जिनिवा कन्वेंशन (Geneva Conventions) क्या है ? - DO YUVA NEWS

Trending news, technical news biography news,politics news, national news , international news, general knowledge news, sports news, economics news, social media news, entertainment news, viral videos news, health news etc. all type news available here.

Breaking

Home Top Ad

Post Top Ad

Thursday, February 28, 2019

जिनिवा कन्वेंशन (Geneva Conventions) क्या है ?

जिनीवा कन्वेंशन (Geneva Conventions) की जानकारी पढ़े.


दोस्तों आज हम ' जिनिवा कन्वेंशन ' यह एक नाम बहुत सुन रहे हे, लेकिन लोगो में एक सवाल बन गया है कि यह जिनीवा कन्वेंशन हे क्या ? बुधवार को पाकिस्तान ने भारत के जम्मू - कश्मीर इलाके में एयर स्ट्राइक की और उसमें हमरा एक लडाकु जहाज क्रश होकर गिर गया ।जो जहाज क्रश हुआ था  उसमें भारत के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान भी थे ऒर उनोन्हे अपनी जान बचाने के लिए लडाकु जहाज़ से छलांग लगा दी और पाकिस्तान में उनका पैराशूट लैंड कर गया।  अभिनंदन जी पाकिस्तानी आर्मी के हात लग गए उसके बाद पाकिस्थान ने जिनीवा संधि का उलघंन करते हुए हमारे विंग कमान्डर का वीडियो ओऱ फोटो जारी कर दिए ओऱ  कमांडर के साथ बदसलूकी करते हुए उन्हें प्रताड़ित किया । इस वजह से संधि के नियम पाकिस्तान ने तोड़ दिए।



***पहली जिनीवा कन्वेंशन की तस्वीर***
 (Geneva Conventions)

जिनिवा कन्वेंशन (Geneva Conventions) का इतिहास :



1859 में एक लड़ाई हुई थी फ्रेंच आर्मी और ऑस्ट्रेलिया की आर्मी के बीच में  जिसका नाम था 'सोलफेरिनो लड़ाई '   इस लड़ाई में बहुत सारे सैनिक घायल हो गए थे। इसके बाद एक स्विस  व्यापारी जिनका नाम ' हेनरी डुनेन्ट '  था वह उन घायल सैनिको से  मिलने गए थे । वहाँ जाकर उनोन्हे देखा की सैनिकों की हालत बहुत गंभीर थी ऒर उन्हें दवाई ओर चिकित्सा की बहुत कमी महसूस हो रही थी। डुनेंट ने इन सभी सैनिको की मदद की ओऱ उन्हें बचाया गया।



जिनिवा कन्वेंशन की सुरुवात & पहली जिनीवा कन्वेंशन  (Geneva Conventions) :  

 १८६४ की लड़ाई ख़तम होने के बाद एक सोसायटी की स्थापना की गयी जिसका नाम था ' रेड क्रॉस सोसायटी ' जिसका उद्देश्य यह था कि युद्ध में घायल सैनिक और लोगों की मदत करना।  रेड क्रॉस की स्थापना के बाद  जिनीवा में 1864 में पहली संधि हुई ऒर जिसमे युद्ध में घायल लोगो की मदत करने का प्रस्ताव रखा गया।इसके बाद स्विस सरकार को लगा की इस संधि में ओऱ यूरोपियन देश शामिल होने चाहिए।  इसलिए  सभी को आमंत्रित किआ गया ओऱ संयुक्त राज्य अमेरिका  ब्राज़ील ओऱ  मेक्सिको जैसे 16 देशों ने जिनिवा की परिषद में 26 प्रतिनिधि को भेजा ।22  अगस्त 1864 को एक संधि की गयी जो पहली जिनिवा संधि से जानी जाती है जिसमें युद्ध में घायल  सैनिको की मदद करने का प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किये गए । इस प्रस्ताव पर 16 में से सिर्फ 12 देशो ने ही हस्ताक्षर किये थे।



दूसरी जिनिवा  कन्वेंशन  (Geneva Conventions) :



1906 में स्विस सरकार द्वारा एक संमेलन बुलाया गया जिसमें 35 राज्य की सरकारों ने हिस्सा लिया।
इस संमेलन में 1864 के जिनिवा संधी में कुछ सुधार किये गए ओऱ  समुद्री युद्ध में घायल ऒर बीमार सैनिको की मदद के लिए इसे अपनाया गया।



तिसरी जिनिवा  कन्वेंशन (Geneva Conventions) : 



 इस संधी में युद्ध में जो सैनिक कैद किये जाते है उनके  संरक्षण ओऱ उपचार से संबंधित है।  यह संधी ने  1929 के जिनिवा संधी की जगह ले ली थी। इस वक्त जो भारत के विंग कमांडर अभिनदंन जी  पाकिस्तान के कैद में हे उनका संरक्षण इस संधी से संबंधित है।




चौथी जिनीवा कन्वेंशन (Geneva Conventions) :  



इस संधी में पहले वाली जिनिवा संधी के अंदर बदलाव करके नया प्रस्ताव जोड़ा गया । जिसमे  युद्ध के बाद जिस राज्य को अपने राज्य में शामिल किया जाता है वहाँ के जो नागरिक होते है उनकी सुरक्षा करने के हेतु बदलाव किया गया था।यह पहला ऐसा जिनिवा संमेलन था जो सैनिको  से संबंधित नही था बल्कि नागरिको की सुरक्षा सबंधित था।


यह जिनिवा कन्वेंशन के मुताबिक अगर दो देशों के  युद्ध में अगर कोई सैनिक घायल हो जाता है और दुश्मन देश उसे कैद कर लेता हे  तो उसका पूरी तरह से संरक्षण करना दुश्मन देश  का काम है उसे की सी भी तरह की मारपीट नहीं करना ऒर उसके साथ अच्छा बर्ताव कर के उसका उपचार करना चाहिए किसी भी तरह का बर्बरता पूर्ण व्यवहार उस से नही करना चाहिए।

 (Geneva Conventions)


इसके बाद युद्ध में कैद हुए सैनिक़ो को  सिर्फ उनका नाम ,पता ,सैन्य पद, उनकी तुकड़ी के बारे में ही पूछा जा सकता है । उनको डराया धमकाया नहीं जा सकता । यह संधी पुरुष ओऱ स्त्री दोनों सैनिकों पे लागु होती हे , ओऱ जिस भी सैनिक को कैद किया जाता है उसे उसके देश को वापस लौटाना चाहिए ।
इस  संधी के मुताबिक हमारे देश के विंग कमाण्डर अभिनंदन जी को पाकिस्तान को लौटाना होगा अगर अगर पाकिस्तान नहीं लौटता हे तो उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया जायेगा जिनिवा कन्वेंशन के नियम तोड़ने के लिए।


दोस्तों आपको हमारी यह जानकारी कैसी लगी कॉमेंट में अपनी राय दिजीये ।
धन्यवाद।




No comments:

Post a Comment