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Saturday, March 16, 2019

Why Holi is Celebrated ? ( होली क्यों मनाई जाती है ? )

  Why Holi is Celebrated ? 

होली क्यों मनाई जाती है ?


 image source : ashram.org
Why Holi is Celebrated
Why Holi is Celebrated ?

होली मनाने के पिछे एक कहानी जुड़ीं हुई है । हिंदुपुराण के अनुसार सति युग में एक राक्षस राजा जिसका नाम हिरण्यकश्यप था  उसने अपने  ताकद से लोगो का जीना हराम कर दिया था। इस राजा हिरण्य कश्यप ने घौर तपश्चर्या करके भगवान ब्रम्हा से वरदान प्राप्त किया था । की न वह रात में मरे न दिन में , ना उसे नर मार पाये न नारी  , न उसे कोई देवता मार पाये न राक्षस, न कोई पशु मार पाये न पक्षी , न कोई अस्त्र मार पाये न कोई शस्त्र ,  भगवान ब्रम्हा  ने उसको यह वरदान उसके तपश्चर्या के कारण दे दिया था ।





इस वरदान के कारण हिरण्यकश्यप  ने अपने राज्य में घोषित कर दिया की आज से कोई भी भगवान विष्णु की पूजा नहीं करेगा सब मेरी ( हिरण्यकश्यप ) ही पूजा करेंगे ओऱ जो उसकी पूजा नहीं करेगा उसको मृत्यु दंड दिया जायेगा । मृत्यु दंड की वजह से सारे लोग उसकी पूजा करने लगे लेकिन उसका स्वयं का पुत्र प्रल्हाद भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त निकला उसने अपने पिता की पूजा करने से इन्कार कर दिया । जिससे हिरण्यकश्यप बहुत ग़ुस्से में आ गया ओऱ उसने अपने पुत्र को  मारने के लिए कहि सारे प्रयास किये उसने प्रल्हाद को  साँपो के तहखाने में बंद कर दिया लेकिन भक्त प्रल्हाद के सर पर भगवान विष्णु का आशीर्वाद था ।  इसलिए प्रल्हाद को कुछ नही हो पाया।




इसके बाद प्रल्हाद को हाती के पैरों तले कुचलने का आदेश दे दिया गया लेकिन यह प्रयास भी असफल रहा । इसके बाद हिरण्यकश्यप ने आदेश दिया की प्रल्हाद को पर्वत से नीचे फेंक दिया जाये । सैनिक प्रल्हाद को एकांचल पर्वत पर ले गये ओऱ वह से नीचे बेतवा नदी में फेंक दिया ।  भक्त प्रल्हाद को नीचे फेकने के बाद भक्त प्रल्हाद की सहायता करने  भगवान विष्णु ने स्वयं  भक्त प्रल्हाद को अपने गोदी में बिठा कर बचा लिया ।





Why Holi is Celebrated
Why Holi is Celebrated ?

हिरण्यकश्यप के इन सारे प्रयास पर पानी फेर जाने के बाद उसकी बहन होलिका ने हिरण्यकश्यप से कहा की मुझे  वरदान मिला है कि में आग में नही जल सकती है । जिसकी वजह से वह प्रल्हाद की लेकर आग में बैठ जायेगी ओर जिसके कारण प्रल्हाद जल कर मर जायेगा। एक दिन योजना के अनुसार हिरण्यकश्यप ने लकड़ियों का ढेर बनाने का आदेश  दिया ओऱ उसमे होलिका के साथ भक्त प्रल्हाद को बिठाया गया ओऱ  लकड़ियों में आग लगा दी गयी होलिका को वरदान के स्वरूप में एक चादर मिली थी जिसके कारण वह जल नही सकती थी होलिका वह चादर ओढ़ कर बैठी थी    लेकिन भगवान  विष्णु की कृपा से  वह चादर भक्त प्रल्हाद के ऊपर चली गयी ओऱ भक्त प्रल्हाद  बच गया ओऱ होलिका जल गयी , ओऱ तब से होलिका दहन किया जाने लगा ।

Why Holi is Celebrated
Why Holi is Celebrated 


हिरण्यकश्यप के सारे असफल प्रयासो के बाद उसने स्वयं भक्त प्रल्हाद को मारने का फैसला किया जब हिरण्यकश्यप भक्त प्रल्हाद को मारने लगे तब अचानक से भगवान  विष्णु  ने नरसिंह अवतार में प्रकट हुए  ओर हिरण्यकश्यप का  अपने नाखूनों से वध कर दिया । तब से रंग ओऱ गुलाल के साथ होली का त्यौहार मनाया जाने लगा । जो आज भी हम मनाते आ रहे है ।






आपको हमारी यह जानकारी केसी लगी कॉमेंट में अपनी राय दीजिये ।
धन्यवाद ।

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